Friday, December 12, 2008

भावनाओ को समझों

एक बार एक गरीब आदमी ने कुछ लॉटरी के टिकेट ख़रीदे। सौभाग्य से उसकी लॉटरी भी खुल गई और वह भी एक-दो नही पुरे पाँच करोड़ की। अब अधिकारीयों ने सोचा मजदूर आदमी है, पाँच करोड़ की बात सुनेगा तो कही खुशी के मारे इस झटके को सह भी सकेगा या नही। उन्होंने एक मनोवैज्ञानिक की मदद लेने की सोची। उन्होंने यह सूचना उस आदमी तक pरेषित करने की जिम्मेदारी एक दोक्ट्दर को सौपी।

डोक्टर जब यह सूचना देने उसके घर पंहुचा तो उसकी टूटी-ज्फुती झोपडी Dएख कर दंग रह गया। तब उसने मजदूर से पुचा तुम्हे इस झोपडी की मरम्मत के लिए कितने पैसे लगेंगे? मजदूर बोला पहले खाने-पिने का इंतजाम हो जाए तब मरम्मत की सोचूंगा। फिर डोक्टर ने कहा की अच्छा चलो मैं पैसे का इंतजाम करा दू तो। तो? मजदूर ने कहा आप क्यों करोगे? डोक्टर बोला, मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हु इसलिए। कितने पैसे देंगे आप मुझे, मजदूर ने pउचा। मानलो पच्चास hajar मिल जाए तो। अब मजदूर को लगा यह आदमी मजाक कर रहा है। उसने भी ने मजाक के लहजे में कहा, चुनाओ तो ख़तम हो चुके बाबु साब। फिर भी अगर मुझे इतने पैसे मिल जाए तो समझ लो आधे आपके। डोक्टर ने मुस्कुराकर कहा अगर पाँच लाख मिल जाए तो। मजदूर ने कहा - हा तो भी। अब डोक्टर असली बात पर आ गया। उसने कहा तुम्हारी लॉटरी खुली है।

मजदूर - पाँच करोड़ वाली।
डोक्टर - हा-हा, पाँच करोड़ वाली।
मजदूर - आपके चरण हमारे द्वार पड़े, हमारे भाग खुल गए।
डोक्टर - अब आप क्या करोगे।
मजदूर - मैंने पहले भी कहा था, आधे आपके। इसलिए ढाई करोड़ आपके।

इतना सुनना था, की डोक्टर गश खाकर निचे गिर पड़े। उनके दिल की धड़कन बंद हो चुकी थी।
संवेदनाये जब तीव्र होती है तो अनहोनी, होनी हो जाती है। इंसान को हर परिस्थिथि में अपनी संवेदनाओ को काबू में रखते आना चाहिए.

7 comments:

!!अक्षय-मन!! said...

bahut acche se samajh gaye ji is baat ko lekin kissa wakai jabardast tha..........
๑۩۞۩๑वंदना शब्दों की ๑۩۞۩๑

mehek said...

bahut sahi kahani.bahut khub

प्रकाश गोविंद said...

हा,,,,हा,,,,हा,
अच्छी सुनाई भाई आपने !

इस प्रेरक प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों का दिल टटोलने से पहले स्वयं का दिल टटोल लेना चाहिए !

यूँ यी प्रेरणात्मक विचार हम तक पहुंचाते रहिये !

मेरी शुभकामनाएं

रचना गौड़ ’भारती’ said...

पैसे की ्भूख गरीब से ज्यादा अमीर को होती है क्योंकि गरीब को पैसे का चस्का नहीं लगा होता । गरीब तो हर हाल में खुश रहना जानता है । हुआ वही गरीब का कुछ नही हुआ और डाक्टर ही घस खाकर गिर गया । बहुत अच्छी बात लिखी है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर ...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Manoj Kumar Soni said...

जबरदस्त
बहुत सुंदर
सच कहा है
बहुत ... बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
टेम्पलेट अच्छा चुना है
कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें
कृपया मेरा भी ब्लाग देखे और टिप्पणी दे
http://www.ucohindi.co.nr

Anonymous said...

wah,maza aa gaya, bahut dino bad aisi gambheer bat itne majedar tareeke se padhne ko mili.

--------------------------"VISHAL"

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